चैंबर 817 · जिला न्यायालय, गाज़ियाबाद
गाज़ियाबाद में आपराधिक, तलाक और संपत्ति के मामलों के अधिवक्ता
अधिवक्ता विशु कुशवाहा 15 वर्ष से अधिक समय से गाज़ियाबाद जिला न्यायालय और इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वकालत कर रहे हैं। चैंबर जमानत और आपराधिक मुकदमे, चेक बाउंस, तलाक और कस्टडी, और संपत्ति विवाद के मामले देखता है: पहले पुलिस नोटिस से अंतिम आदेश तक।
एफआईआर, नोटिस, समन, बैनामा या आदेश। पहली नज़र के लिए WhatsApp फ़ोटो काफ़ी हैं।
- 15+ वर्ष
- विचारण और अपीलीय अदालतों में
- चैंबर 817
- जिला न्यायालय परिसर, आरडीसी
- गाज़ियाबाद + इलाहाबाद
- जिला न्यायालय और उच्च न्यायालय
- सोम–शनि
- सुबह 9 से रात 9, रविवार बंद
कार्यक्षेत्र
चैंबर किस तरह के मामले लेता है
नीचे हर पृष्ठ बताता है कि उस तरह का मुकदमा गाज़ियाबाद की अदालतों में कैसे चलता है: कौन-सी अदालत सुनती है, समय-सीमाएँ क्या हैं, कौन-से कागज़ चाहिए, और लोग सबसे ज़्यादा क्या पूछते हैं।
गाज़ियाबाद में आपराधिक मामलों के वकील
एफआईआर, पुलिस नोटिस, मुकदमे की पैरवी, उच्च न्यायालय में एफआईआर रद्द कराना।
- मजिस्ट्रेट अदालतें और सत्र न्यायालय, आरडीसी
- पुराने आईपीसी और नए बीएनएस के मुकदमे
- इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एफआईआर रद्द कराने की याचिकाएँ
जमानत और अग्रिम जमानत
मजिस्ट्रेट, सत्र न्यायालय और उच्च न्यायालय, डिफ़ॉल्ट जमानत।
पूरा मार्गदर्शन पढ़ें आपराधिकचेक बाउंस (धारा 138)
कानूनी नोटिस, परिवाद, बचाव और समझौता।
पूरा मार्गदर्शन पढ़ें पारिवारिकतलाक और बच्चों की कस्टडी
आपसी सहमति, विवादित तलाक, कस्टडी, भरण-पोषण।
पूरा मार्गदर्शन पढ़ें पारिवारिक498A, दहेज और घरेलू हिंसा
शिकायतकर्ता या अभियुक्त परिवार, दोनों के लिए।
पूरा मार्गदर्शन पढ़ें दीवानी और संपत्तिसंपत्ति और दीवानी विवाद
निषेधाज्ञा, बंटवारा, कब्ज़ा, दाखिल-ख़ारिज, पैसे की वसूली।
पूरा मार्गदर्शन पढ़ेंपहले कागज़ भेजिए
साफ़ फ़ोटो या पीडीएफ़ और छोटा-सा विवरण WhatsApp पर भेजें। आपको बताया जाएगा कि मामले में कोई तुरंत कदम ज़रूरी है या नहीं, और चैंबर कब आना है।
WhatsApp +91 98710 27648पहले पुलिस नोटिस से अंतिम आदेश तक।
अधिवक्ता
अधिवक्ता विशु कुशवाहा के बारे में
विशु कुशवाहा 15 वर्ष से अधिक समय से अधिवक्ता के रूप में वकालत कर रहे हैं। उनका अधिकांश काम गाज़ियाबाद की विचारण अदालतों में है: जमानत के मामले, आपराधिक मुकदमे, वैवाहिक मामले और दीवानी वाद; और इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एफआईआर रद्द कराने की याचिकाएँ, अपीलें और रिट।
वे आरडीसी स्थित जिला न्यायालय परिसर के चैंबर 817 से काम करते हैं, इसलिए गाज़ियाबाद की अदालतों में दाखिला और उसी दिन की मेंशनिंग चैंबर स्वयं करता है। भूलेख और राजस्व के मामले तहसील परिसर के चैंबर 80 से देखे जाते हैं।
उन्होंने आरआईसीएस से रियल एस्टेट में एमबीए भी किया है, जो संपत्ति विवादों में काम आता है: टाइटल की शृंखला, जीडीए की आवंटन फ़ाइल या खतौनी की प्रविष्टि पढ़ना काम का हिस्सा है।
अदालतें और क्षेत्र
- जिला एवं सत्र न्यायालय, गाज़ियाबाद, राज नगर डिस्ट्रिक्ट सेंटर (मजिस्ट्रेट अदालतें, सत्र न्यायालय, सिविल अदालतें)
- परिवार न्यायालय, गाज़ियाबाद: तलाक, भरण-पोषण, कस्टडी
- राजस्व अदालतें, तहसील गाज़ियाबाद: दाखिल-ख़ारिज और भूलेख
- इलाहाबाद उच्च न्यायालय: जमानत, एफआईआर रद्द, आपराधिक और दीवानी अपीलें, रिट
मुवक्किल ज़्यादातर इन इलाकों से आते हैं, जो सभी गाज़ियाबाद की अदालतों के अधीन हैं:
- राज नगर
- कवि नगर
- राज नगर एक्सटेंशन
- इंदिरापुरम
- वैशाली
- वसुंधरा
- कौशांबी
- क्रॉसिंग्स रिपब्लिक
- साहिबाबाद
- लोनी
- मोदीनगर
- मुरादनगर
प्रक्रिया
मामला कैसे आगे बढ़ता है
चार चरण, जमानत की अर्जी, तलाक की याचिका या संपत्ति के वाद, सबके लिए एक जैसे।
- 01कागज़ भेजें या लाएँ
एफआईआर, नोटिस, समन, बैनामा या आदेश। पहली नज़र के लिए WhatsApp फ़ोटो काफ़ी हैं।
- 02पहली पड़ताल
कागज़ पढ़े जाते हैं, कोई समय-सीमा हो तो बताई जाती है, और आपको साफ़ शब्दों में बताया जाता है कि कानून क्या अनुमति देता है और क्या नहीं।
- 03ड्राफ़्टिंग और दाखिला
अर्जी, जवाब, परिवाद या वाद का मसौदा तैयार होता है, आपके साथ जाँचा जाता है, और सही अदालत में दाखिल किया जाता है।
- 04सुनवाइयाँ और जानकारी
चैंबर हर तारीख़ पर पेश होता है और आपको बताता है कि क्या हुआ और आगे क्या होगा।
सवाल
लोग अक्सर पूछते हैं
आपका सवाल यहाँ नहीं है? कागज़ों के साथ WhatsApp पर भेजें।
WhatsApp पर पूछेंचैंबर कहाँ है, और मैं कब आ सकता हूँ?
चैंबर 817 जिला न्यायालय परिसर, राज नगर डिस्ट्रिक्ट सेंटर (आरडीसी), गाज़ियाबाद 201002 में है। राजस्व और भूलेख के काम के लिए तहसील परिसर में दूसरा चैंबर, चैंबर 80, है। चैंबर सोमवार से शनिवार, सुबह 9 से रात 9 बजे तक खुला रहता है। आने से पहले फ़ोन कर लें, क्योंकि अधिवक्ता प्रायः अदालत में होते हैं।
मेरा मुकदमा किस अदालत में जाएगा?
गाज़ियाबाद जिले के ज़्यादातर आपराधिक मुकदमे आरडीसी परिसर में मजिस्ट्रेट के सामने शुरू होते हैं। मजिस्ट्रेट द्वारा नामंज़ूर जमानत और गंभीर अपराध सत्र न्यायालय, गाज़ियाबाद में जाते हैं। पति-पत्नी के बीच तलाक, भरण-पोषण और कस्टडी के मामले परिवार न्यायालय में, संपत्ति के वाद सिविल जज के यहाँ और दाखिल-ख़ारिज जैसे राजस्व मामले तहसील की राजस्व अदालतों में सुने जाते हैं। एफआईआर रद्द कराने की याचिका और अपीलें इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दायर होती हैं।
पहली मुलाक़ात में क्या लेकर आऊँ?
जो भी कागज़ आपके पास हों: एफआईआर या पुलिस नोटिस, अदालत का समन, कानूनी नोटिस, चेक और बैंक का रिटर्न मेमो, विवाह प्रमाणपत्र, या बैनामा और खतौनी। अपना पहचान पत्र और तारीख़ों के साथ एक पन्ने की समय-रेखा भी लाएँ। यदि दूसरे पक्ष का विवरण पता हो, तो वह भी।
क्या मैं पहले अपने कागज़ WhatsApp पर भेज सकता हूँ?
हाँ। दस्तावेज़ों की साफ़ फ़ोटो या पीडीएफ़ और जो हुआ उसका छोटा-सा विवरण +91 98710 27648 पर WhatsApp करें। आपको बताया जाएगा कि मामले में कोई तुरंत कदम ज़रूरी है या नहीं, जैसे जमानत की अर्जी या समय-सीमा से पहले नोटिस का जवाब, और चैंबर कब आना है।
मुकदमे में खर्च कितना आएगा?
यह अदालत, मुकदमे के चरण और इस बात पर निर्भर है कि कितना ड्राफ़्टिंग और कितनी सुनवाइयाँ चाहिए। फ़ीस पर बात कागज़ पढ़ने के बाद ही होती है, फ़ोन पर बिना देखे कभी नहीं बताई जाती। कोर्ट फ़ीस और स्टाम्प शुल्क अलग हैं और सरकार द्वारा तय हैं।
मेरी एफआईआर आईपीसी में है, पर वेबसाइटें बीएनएस की बात करती हैं। कौन-सा लागू होगा?
यह तारीख़ पर निर्भर है। 1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज एफआईआर आईपीसी और सीआरपीसी के तहत ही चलती हैं। उस तारीख़ को या उसके बाद दर्ज एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के तहत हैं। इसलिए धारा 420 आईपीसी (धोखाधड़ी) पुरानी एफआईआर में सही है, जबकि नई में वही अपराध धारा 318(4) बीएनएस है।
क्या आप नोएडा, दिल्ली या गाज़ियाबाद के बाहर के मामले लेते हैं?
रोज़ की वकालत गाज़ियाबाद की अदालतों में है, इसलिए इंदिरापुरम, वैशाली, वसुंधरा, राज नगर एक्सटेंशन, लोनी, मोदीनगर और आसपास के इलाकों के लोग मुख्य मुवक्किल हैं। उत्तर प्रदेश के दूसरे जिलों के मामले इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लिए जा सकते हैं, और गौतमबुद्ध नगर (सूरजपुर) की अदालतों में भी पेशी होती है।
मेरा मुकदमा कितना समय लेगा?
कोई भी तारीख़ का वादा नहीं कर सकता। जमानत की अर्जियाँ आमतौर पर कुछ दिनों में सुनी जाती हैं। आपसी सहमति से तलाक में कम से कम छह महीने लगते हैं, जब तक अदालत प्रतीक्षा अवधि माफ़ न करे। चेक बाउंस और दीवानी मुकदमे अक्सर एक साल या उससे अधिक चलते हैं, अदालत के बोझ पर निर्भर करते हुए।
आइए या लिखिए
चैंबर 817, जिला न्यायालय, गाज़ियाबाद
- चैंबर 817, जिला न्यायालय परिसर, राज नगर डिस्ट्रिक्ट सेंटर (आरडीसी), गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश 201002
- चैंबर 80, तहसील परिसर, गाज़ियाबाद, राजस्व और भूलेख के काम के लिए
- सोमवार से शनिवार, सुबह 9 से रात 9 बजे. सोम–शनि, सुबह 9–रात 9